YouTube और Instagram एक्टिंग
Reels और YouTube पर भी अभिनय ही चलता है, बस कैमरा फ़ोन का होता है और दर्शक के पास स्क्रॉल करने का बटन। यहाँ टिकने के लिए ये बातें सीखिए।
फ़ोन का कैमरा बहुत क़रीब होता है
फ़ोन पर ज़्यादातर शॉट क्लोज़-अप होते हैं। इसलिए छोटे भाव भी बड़े दिखते हैं। चेहरे को ढीला रखिए, आँखों से बात कहिए और बेवजह हाथ हिलाने से बचिए।
पहले तीन सेकंड
दर्शक पहले तीन सेकंड में तय करता है कि रुकेगा या नहीं। वीडियो किसी सवाल, टकराव या मज़ेदार पल से शुरू कीजिए, परिचय से नहीं।
एक पहचान वाला किरदार
जो चैनल चलते हैं, उनमें अक्सर एक पहचान वाला किरदार होता है, जैसे गैपिस्तान का "चाचा"। अपना किरदार चुनिए, उसकी बोली, आदतें और सोच तय कीजिए, और उसे हर वीडियो में निभाइए।
कॉमेडी की टाइमिंग
कॉमेडी में ठहराव ही पंच है। लाइन के बाद आधा पल रुकिए, सामने वाले की प्रतिक्रिया को समय दीजिए। Improvisation का अभ्यास कीजिए, ताकि बिना स्क्रिप्ट के भी सीन चल सके।
सादी रोशनी, साफ़ आवाज़
महँगे कैमरे की ज़रूरत नहीं। खिड़की की रोशनी चेहरे पर, शांत जगह और सस्ता लेपल माइक, इतने से वीडियो पेशेवर लगने लगता है।
नियमितता
एक वायरल वीडियो से चैनल नहीं बनता। तय दिन पर प्रकाशित कीजिए, आँकड़े देखिए कि दर्शक कहाँ छोड़ते हैं, और अगले वीडियो में वही सुधारिए।
कोर्स में यह सब
Indian Films Academy के तीनों कोर्स में "अपना चैनल" प्रशिक्षण शामिल है: YouTube और Instagram एक्टिंग, मोबाइल शूट, Hook, टाइटल-थंबनेल और नियमित प्रकाशन, अपने ही चैनल पर करके।