ऑडिशन कैसे दें: 10 तकनीकें
ऑडिशन में अच्छा अभिनय ही काफ़ी नहीं, कास्टिंग टीम के काम को आसान बनाना भी ज़रूरी है। ये 10 बातें हर ऑडिशन में काम आती हैं।
तैयारी
- दृश्य पूरा पढ़िए, सिर्फ़ अपनी लाइनें नहीं। समझिए कि किरदार क्या चाहता है और उसे क्या रोक रहा है।
- लाइनें इतनी याद कीजिए कि सोचना न पड़े, ताकि ध्यान सामने वाले पर रहे।
- किरदार के लिए एक सच्चा कारण खोजिए। Yogesh CineAct में इसे Self-Linking कहते हैं: किरदार के भाव को अपने किसी असली अनुभव से जोड़ना।
कैमरे के सामने
- स्लेट (नाम, लंबाई, शहर) मुस्कुराकर, सीधा और छोटा रखिए। यही आपकी पहली छाप है।
- आईलाइन कैमरे के बिल्कुल पास रखिए, जब तक सीधे लेंस में देखने को न कहा जाए।
- बोलने से ज़्यादा सुनिए। क्लोज़-अप में आपकी प्रतिक्रिया ही सबसे ज़्यादा दिखती है।
- भाव को ज़बरदस्ती मत कीजिए। Don't Do, Let It Happen: भाव को होने दीजिए, कैमरा नकली भाव तुरंत पकड़ता है।
सेल्फ़-टेप
- रोशनी चेहरे के सामने से, खिड़की या एक साधारण लाइट से; पीछे सादी दीवार।
- फ़ोन आँख के स्तर पर, आवाज़ के लिए शांत कमरा या सस्ता लेपल माइक।
- दो अलग तरीक़ों से रिकॉर्ड कीजिए, और जो कहा गया है, उसी फ़ॉर्मेट और नाम से फ़ाइल भेजिए।
ऑडिशन के बाद
एक ऑडिशन से कोई फ़ैसला नहीं होता। हर ऑडिशन की रिकॉर्डिंग ख़ुद देखिए और एक चीज़ सुधारिए। जो कलाकार लगातार बेहतर होता है, कास्टिंग टीम उसे याद रखती है।
कक्षा में अभ्यास
Indian Films Academy के सिनेमैटिक एक्टिंग कोर्स के दूसरे महीने में ऑडिशन और सेल्फ़-टेप का पूरा मॉड्यूल है: असली स्क्रिप्ट, कैमरा और हर टेक पर सुधार।